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Pooja & Anushthan

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समस्त वैदिक कर्मकांड (अनुष्ठान, पूजा)

हमारे सनातन धर्म में पूजा-पाठ व अनुष्ठानों का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। चाहे व्रत हो, व्रत-उद्यापन हो, तीज-त्योहार की पूजा हो या अन्य कोई अनुष्ठान हो। इन्हें सम्पन्न कराने के लिए कर्मकाण्डी ब्राह्मणों की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा-पाठ व अनुष्ठानों को किन ब्राह्मणों से सम्पन्न कराया जाना चाहिए। शास्त्रों में इसका स्पष्ट निर्देश हमें मिलता है।

‘काम क्रोध विहीनश्च पाखण्ड स्पर्श वर्जित:।
जितेन्द्रीय: सत्यवादी च सर्व कर्म प्रशस्यते॥’

अर्थात्- जो विप्र काम, क्रोध से निर्लिप्त हो। पाखण्ड ने जिसे स्पर्श तक ना किया हो। जो जितेन्द्रीय और जो सत्यवादी हो, यह शास्त्र की पहली शर्त है। इसके अतिरिक्त पूजा-पाठ व अनुष्ठान कराने वाले विप्रों का उच्चारण शुद्ध हो तथा वे मन्त्रों व श्लोकों के अर्थ से भलीभांति परिचित हों। शास्त्रानुसार ऐसे ही ब्राह्मणों से पूजा-पाठ व अनुष्ठान कराना श्रेयस्कर होता है।

भारतीय जीवन पद्धति की सनातन परम्पराओ में हवन, पूजन , यज्ञ , पाठ आदि कर्मकाण्डों का विशेष महत्व है पूजा, पाठ, जप, हवन , यज्ञ आदि अनुष्ठान हमारे भौतिक एंव आध्यात्मिक जीवन के संकल्पो की सिद्धि में हमे दैवीय सहयोग प्रदान करते है ! इन्हें करने से हमे विशेष देव कृपा प्राप्त होती है ! जो हमे ऊर्जा , ओज पवित्रता व् आत्मविज्ञात से भर देती है अनुष्ठान अपने विशेष दैवीय प्रभाव से हमारी मन शक्ति, संकल्प शक्ति एंव क्रिया शक्ति को आश्चर्य जनक रूप से बड़ा देते है जो हमारे जीवन की भौतिक एवं आध्यत्मिक सफलता के लिए अतयंत आवश्यक है भारतीय ज्योतिष में पूजा,पाठ .जप,हवन,यज्ञ आदि का विशेष महत्व है ग्रहो के दोषो की शांति, प्रसन्नता , व् अनुकूलता के लिए इन्हें उपाय के रूप मैं भी सम्पन्न किया जाता है प्रभुजी ज्योतिष.कॉम आपको कुशल, योग्य, अनुभवी, विद्वानों के माध्यम से अनुष्ठान सम्पन्न की सेवा मैं सहयोग एवं मार्गदर्शन करता है

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नजर दोष निवारण पूजा

  • जन्म के साथ ही जुड़ जाने वाली नकारात्मक शक्तियों या प्रभाव को दूर करने के लिए। 
  •  कार्य—व्यापार और जीवन में सकारात्मक शक्ति का प्रवाह के लिए। 
  • करियर में कामयाबी और मनचाहा करियर प्राप्त करने के लिए। 
  • जीवन में उच्च शिक्षा पाने के लिए। 
  • शादी में आ रही अड़चनों को दूर करने और सही समय पर विवाह के लिए। 
  •  धन—संपदा कायम रखने के लिए। 
  • बेहतर स्वास्थ्य या सेहत में शीघ्र सुधार के लिए। 
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काला जादू दूर करने वाला हनुमत अनुष्ठान

  • इस दिव्य अनुष्ठान से हनुमत भक्तों को बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
  •  सभी संकटों को दूर करते हुए श्री हनुमान जी शत्रुओं पर विजय दिलाते हैं।  
  •  किसी भी प्रकार का नजर दोष या काला जादू जड़ से समाप्त हो जाता है। 
  •  हनुमत भक्तों को भय र रोगों से शीघ्र मुक्ति मिलती है। 
  • जीवन से जुड़ी सभी बाधाओं और कष्ट को दूर होता है।
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धन-धान्य और समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की विशेष पूजा

  •  धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति
  •  जीवन में सुख और समृद्धि का विस्तार
  •  सभी प्रकार के कष्ट और बाधाओं से मुक्ति
  • सुखी दांपत्य और सफल पारिवारिक जीवन
  •  नौकरी—कारोबार में सफलता
  • शुक्र-दोष से जुड़े संकटों से बचाव
  •  आर्थिक तंगी को दूर कर, धन—धान्य से परिपूर्ण होने के लिए।
  •  समाज में प्रतिष्ठा एवं सम्मान के लिए।
  •  साधक की शक्ति, ज्ञान और सम्मान में वृद्धि होती है। 
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महामृत्युंजय अनुष्ठान

जन्मकुंडली में सूर्यादि नवग्रहों के द्वारा किसी प्रकार की अनिष्ट की आशंका हो या मारकेश आदि लगने पर किसी किसी प्रकार की भयंकर बीमारी व मृत्युतुल्य कष्ट होने पर , अपने बन्धु – बान्धवों तथा इष्ट मित्रो पर किसी भी प्रकार का संकट आया हो, या देश विदेश जाने या किसी प्रकार से वियोग होने पर , स्वदेश , राज्य व धन सम्पत्ति विनिष्ट होने की स्थिति में, अकाल मृत्यु का भय, एवं किसी तरह की मिथ्या दोषारोपण लगने पर, उद्विग्नचित्त एवं धार्मिक कार्यो से मन विचलित होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप , अनुष्ठान कर भगवान महामृत्युंजय की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है | ऐसा कहा जाता है कि एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवताओं की पूजन स्वतः हो जाती है l
”सर्वे देवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवत्मका: "

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पितृदोष शान्ति पूजन

जीवन मे पितृदोष के कारण कई प्रकार की समस्याओं का सामना जातक को करना पड़ता है । पितृदोष कई कारणों से होता है जैसे (1)पितरों का दाह संस्कार सही प्रकार से ना होना । (2) परिवार में अकाल मृत्यु का होना । (3) मरणोउपरांत क्रिया में कमी होना । (4) अपने मात पिता व अग्रजों का अपमान करना । जिसके कारण वह अपनी संतानों से नाखुश होकर परेशान करते है
जब सूर्य ,चन्द्र, राहु या शनि में से दो ग्रह की युति हो तो जातक को पितृदोष होता है ,पितरों से अभिप्राय व्यक्ति के पूर्वजो से है जो पितृ योनि को प्राप्त हो चुके है, ऐसे सभी पूर्वज जो आज हमारे मध्य नही है परन्तु मोहवश या असमय मृत्यु को प्राप्त होने के कारण आज भी मृत्युलोक में भटक रहे है , अर्थात जिन्हें मोक्ष की प्राप्ति नही हुई है उन सभी की शान्ति के लिए पितृदोष निवारण उपाय किये जाते है

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सुख और सौभाग्य दिलाने वाली पूजा

  • सहनशक्ति को पुनर्जीवित करने के लिए।
  • नौकरी, व्यवसाय और करियर में प्रगति होती है। 
  • सभी प्रकार के दु:ख, शत्रु और बाधाएं दूर होती हैं। 
  •  साधक में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।
  • रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। 
  • पारिवारिक समन्वय और प्रेम में वृद्धि होती है। 
  • मोक्ष की प्राप्ति के लिए।
  • पिछले जन्म में किये बुरे कर्मो के प्रभाव को दूर करने के लिए। 

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