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Relationship Problem

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प्रतिक्रमण : रिश्तों की समस्याओं के समाधान

क्या जीवन में से ईर्ष्या, संदेह, क्रोध, घृणा और अभाव को सफलतापूर्वक दूर करने का कोई तरीका है? अपने जीवन में से टकराव को कैसे दूर कर सकते हैं? अपने परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों के साथ शांतिपूर्ण जीवन कैसे बिताएँ? हम अपने आपको या औरों को दुःख देने से कैसे बच सकते हैं?

‘क्या चोरी और दूसरों की मज़ाक उड़ाने की बुरी आदतों पर काबू पाने का कोई वैज्ञानिक तरीक़ा है?

किसी भी प्रकार के आपसी संबंध में आनेवाली सभी परेशानियों से लड़ने के लिए परम पूज्य ने प्रतिक्रमण का हथियार दिया है, प्रतिक्रमण का इतना प्रभाव पड़ता है कि अगर आप सिर्फ एक घंटा किसी व्यक्ति के प्रतिक्रमण करे, चाहे वह व्यक्ति वहाँ उपस्थित है या नहीं, तो उस व्यक्ति में ज़बरदस्त परिवर्तन हो जाता है। प्रतिक्रमण से आपके प्रति उसकी दुश्मनी कम हो जाएगी और आपको भीतर से भी हल्का मेहसूस होगा।

  • यह प्रतिक्रमण करके तो देखो, फिर आपके घर के सभी लोगों में चेन्ज (परिवर्तन) हो जाएगा, जादूई चेन्ज हो जाएगा। जादूई असर!
  • सामनेवाले को दुःख होने पर समाधान अवश्य करना चाहिए। वह हमारी 'रिस्पोन्सिबिलिटि' (जिम्मेदारी) है। हाँ, दुःख नहीं हो उसके लिए तो हमारी लाइफ (जिन्दगी) है।
  • पहले इलाज पैदा होता है, फिर उसके बाद समस्या या दु:ख आते हैं।
  • दूसरों के प्रति आपके अभिप्राय धो डालें। साबुन लगाकर धो डालें।
  • प्रतिक्रमण माने बीज भुनकर बोना।
  • हमेशा हर तरह का मज़ाक कौन करेगा? बहुत टाइट ब्रेन (तेज दिमा़ग) होगा वह करेगा। अब वह सारा अहंकार गलत ही न! वह बुद्धि का दुरुपयोग ही किया न! मज़ाक उड़ाना यह बुद्धि की निशानी है।
  • जब आप प्रतिक्रमण करने बैठे न, तब अमृत के बिंदु टपकने लगते हैं एक ओर, और हलकापन महसूस होने लगता है।
  • किसी के हाथ में परेशान करने की भी सत्ता नहीं है और किसी के हाथ में सहन करने की भी सत्ता नहीं है। ये तो सभी पूतलें ही हैं। वे सभी काम किया करते हैं। हमारे प्रतिक्रमण करने पर पूतले अपने-आप सीधे हो जायेंगे।


  • ईर्ष्या हो जाने के बाद पश्चाताप करना चाहिए और दूसरा, जो ईर्ष्या हो जाती है वह ईर्ष्या आप नहीं करते हैं। ईर्ष्या वह पूर्व जन्म के परमाणु भरे हुए हैं, उसे एक्सेप्ट (स्वीकार) न करें। उसमें तन्मयाकार नहीं होने से ईर्ष्या उड़ जाएगी। आपको ईर्ष्या होने पर पश्चाताप करना वही उत्तम है।

    वहाँ फिर उसके शुद्धात्मा को याद करके क्षमा माँगना। उसका प्रतिक्रमण करना। यह तो पहले गलतियाँ की थी इसलिए शंका होती है।

    जब तक आप कर्म बांधते हैं, तब तक आपके लिए हमेशा पुनर्जन्म है ही। अगर आप को कर्म बंधन होगा तो अगले जन्म में आपको उसके परिणाम भुगतने ही पड़ेगें। क्या इस सच्चाई से कि भगवान महावीर को अगला जन्म नहीं लेना पड़ा, यह सिद्ध नहीं होता कि रोज़मर्रा का जीवन जीते हुए भी कर्म बंधन न हो?

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